बोलिये, अपनी ज़ुबाँ पर, ताला ना कीजिये।
ज़मीर पर अपने यूँ पर्दा डाला ना कीजिये।।
है ज़िन्दगी वाकई सहल, मुबहम ना कीजिये।
बे-वजह की दुश्मनी पाला ना कीजिये।।
शायरी खुलती है यारों परत दर परत।
इक परत का अर्थ समझ हल्ला ना कीजिये।।
मुख़्तलिफ़ रंग-ओ-मिज़ाजी से बने हैं दिल मियां।
है रेन-बौ, इस रेन-बौ को काला ना कीजिये।।
इश्क़ है दरया कहा है पीर ख़ुसरो ने।
गर मौका मिले, गिर जाइये, संभला ना कीजिये।।
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