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साहित्य, सिनेमा, सियासत, सिंस 2015
Wednesday, 7 March 2018
सपना।
एक सपना टूट जाए,
तुम जाग जाओ और.
और,
उठो फ़िर सकपका के,
घबरा के, डर-डरा के..
जो उठो तो सो ना पाओ,
हम्म! जो उठो तो सो ना पाओ,
इस ही डर से के -
जो सो गए तो,
टूट जाए...गा एक सपना फिर...
Keep Visiting!
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